
Rudra
नरेंद्र गोसाईं ही कायरता मेरे भी भीतर मौजूद है, जो न चाहकर भी बेइमानी और झूठ बोलता हूँ, क्योंकि छ्वी बचाने का डर है, अपनी पहचान और उपभोग की वृत्ति। सत्येंद्रनाथ बोस जैसे बिरला तो एकाध बार ही जीतता है भीतर, जेब आचार्य जी के सामने सत्र अटैंड करते है।















