
Vinit
अहंकार को सीधा देखने की बजाय दूसरे केंद्र पर अपना ध्यान केंद्रित कर लेता हु जिसमें जूठा प्रेम , आकर्षण , शारीरिक अहंकार , मोह , भय ,आदि । यदि किसी से से प्रेम करने भी जा रहा हु तो सही केंद्र - सत्य को दूर रखकर दूसरे केंद्र ( कामनाओं) पर केंद्रित हो जाता हु । यदि किसी बात से डर लग रहा होता है तो खुद को नहीं देखता कोई बाहरी विषय को दोषी ठहरा देता हु। ये ऐसा तब तक था जब तक आचार्य जी से नहीं जुड़ा था ,पर आज अहंकार को दूर करके पहले खुद से सवाल जवाब कर…




























