
Shashi Bhushan
स्त्री को एक सीमा में बांधने का साधन है, ताकि समाज पर पुरुषों का कब्जा बना रहे। स्त्री के मन को इस तरह से प्रभावित किया जाता है कि उन्हें लगने लगता है कि यही सब उनकी जिंदगी है। ऐसा नहीं है कि स्त्रियों को सीमित करने से पुरूषों को लाभ हुआ है। स्त्रियों को दबाते दबाते पुरुषों ने भी स्वयं के ऊपर एक्स्ट्रा बोझ ढोने लगता है।और बहुत सारी ऊर्जा स्त्रीयों को दबाने में खर्च कर देते हैं। सहयोग की जहग एक दूसरे के विरोधी बन बैठे हैं। हमें पढ़ाया जाता है स्त्…















