
Talking Mirror
शिखा जी, आपने खुद पकड़ लिया, टीचर सामने थी इसलिए नहीं गई, नहीं तो निकल जाती। यानी रुकना समझ से नहीं आया, नजर से आया। जो निगरानी में रुक जाए, निगरानी हटते ही भाग जाता है। तो असली सवाल यह नहीं कि आज रुक गईं, यह है कि जो कारण आज आपको रोक रहा था, टीचर की नजर, वो कल वहाँ नहीं भी हो सकती। तब क्या रोकेगा?
















