
Aditya Singh
मैं अपने जीवन के 4 साल एक महिला से आसक्त था,और वो बात अंदर ही अंदर इतनी बड़ी हो गई कि जब वो सपना टूटा तो मुझे लगा की सब खत्म हो गया,अब कुछ बचा ही नहीं मेरे जीवन में। अहंकार को इतना दर्द हुआ कि क्या बताएं,और हां सचमुच पीड़ा जीवन में प्रकाश ला सकती है। इस पीड़ा से पहले मैं गांव का एक निहायती गवार,और भद्दा इंसान था,लेकिन इस पीड़ा को झेलने के बाद भीतर कुछ बदल सा गया और फिर हमको आचार्य जी मिले☺️















