
Vimla Patel
जिस कहानी को मैं अपनी पहचान मानकर जी रहा हूँ, क्या वह वाक़ई पूरा सच है, या सिर्फ़ उन चुनिंदा पलों का जोड़ है जिन्हें चेतना ने बाक़ी सब भुलाकर पकड़ रखा है, और अब जिसे बचाने में मैं अपनी पूरी ताक़त लगा देता हूँ? ह्म्म ऐसा कई बार होता है जब हम अपनी जिंदगी के कुछ खास बुरे पलो को याद रखते हैं और उससे फिर उससे अपने आस पास एक अलग ही दुनिया बसा लेते है , जैसे कि अगर किसी ने हमें कुछ बुरा बोल दिया तो हम उन्हीं शब्दों को पकड़कर बैठ जाते है और अंदर ही अं…















