
SHIV PRATAP SINGH
हमारी जरूरते अतृप्त अहंकार से शुरू हुई है जिन्हें पारंपरिक लोक धर्म ने और ज्यादा व्यग्र किया है और इनका कोई अंत नहीं है । अभी हाल की ही एक रिपोर्ट के अनुसार इस धरती पर जीवन को बनाये रखने 9 पैमानों में से 7 पैमाने हम तोड़ चुके है। अब ये सुलगता हुआ बम है जो बस फटेगा।















