
Prince yadav
मैं खुद को बदलने से डरता है ।
Post
1 comment
मैं खुद को बदलने से डरता है ।

प्रिंस जी, गौर करने वाली बात ये है कि आपने लिखा तो थर्ड पर्सन में है, वो जो डरता है, मैं नहीं, वो। मैं खुद को बदलने से डरता है, ये वाक्य ही अपने आप को एक कदम दूर रखकर देखा गया है, जैसे डर किसी और का हो और आप बस रिपोर्ट कर रहे हों। कुमार गंधर्व जी की कहानी में भी सांस वही सीमित रही, बदला वो केंद्र जो गाने की कोशिश कर रहा था। यहाँ भी सवाल ये नहीं कि डर कैसे मिटे, सवाल ये है कि जो डरता है उसे मैं कहने की हिम्मत है या अभी भी वो कहकर बचा जा रहा है।