
🌸 एक सही चुनाव की ओर बढ़ते कदम🪄 मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे-से गाँव की रहने वाली हूँ। पहले मैं एक अच्छी बच्ची की तरह रहती थी, घर से ज़्यादा बाहर नहीं निकलती थी, किसी से ज़्यादा बात नहीं करती थी और घरवाले जैसा कहते थे, वैसा ही कर लेती थी। मुझे स्पष्ट नहीं था कि मुझे जीवन में क्या करना है। परिवार के बहुत विरोध के बाद भी मैंने मेडिकल की पढ़ाई शुरू की, लेकिन जीवन में कोई स्पष्टता नहीं थी । 🌱 आचार्य जी की शिक्षाओं से मेरी शुरुआत मैंने पहली बार YouTube पर आचार्य जी को सुना, तो ऐसा लगा जैसे मैं जिस चीज़ की तलाश कर रही थी, वह मुझे मिल गई हो। फिर एक दिन संस्था से मेरे पास कॉल आया और मैं तुरंत ही संस्था के लाइव गीता सत्रों से जुड़ गई। सत्र सुनने, अवलोकन साझा करने और परीक्षाएँ देने के दौरान मैंने पहली बार अपने जीवन को समझना शुरू किया। जिसम आचार्य जी की किताबें पढ़ने से भी बहुत मददमिली । फिर मुझे एहसास हुआ कि क्या मैं अपने चुनाव खुद कर रही हूँ या केवल समाज के प्रभाव में चल रही हूँ। 📚🤔 💪 खुद को समझना और अपनी कमजोरियों पर काम करना आचार्य जी की शिक्षाओं से मेरे अंदर धीरे-धीरे स्पष्टता और साहस आने लगा। मैं अपने भीतर की कमजोरियों को देखने लगी, जिससे मेरे डर कम होने लगे । मैं अकेले बाहर निकलने लगी, बाइक चलाना सीखा और अपनी कमजोरियों पर काम करना शुरू किया। मैं आर्थिक रूप से स्वतंत्र भी हो गई। लेकिन जिस जगह नौकरी करती थी, वहाँ खुश नहीं थी। वहाँ का माहौल मुझे अच्छा नहीं लगता था और कई बार घुटन महसूस होती थी। वहां के लोगों के विचार और संगति सही नहीं थी, जिसके कारण आचार्य जी की शिक्षाओं को पूरी तरह से जीवन में उतार पाना मुश्किल हो रहा था। तब मेरे सामने सवाल था कि क्या केवल आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना ही पर्याप्त है, या यह भी ज़रूरी है कि मैं अपना समय और मेहनत किस दिशा में लगा रही हूँ। 🤍 📚 बुक स्टॉल से संस्था तक का सफर🪄 जैसे ही मुझे बुक स्टॉल के बारे में जानकारी हुई, मैंने बुक स्टॉल पर जाना शुरू किया, ताकि आचार्य जी की शिक्षाओं को किताबों के माध्यम से अधिक-से-अधिक लोगों तक पहुँचा सकूँ। और सबसे पहले बुक स्टोल पर जाकर मैं खुद बेहतर होने लगी थी । मैं रात में नौकरी करती थी और दिन में बुक स्टॉल लगाती थी। थकान बहुत होती थी, लेकिन दूसरों तक सही बात पहुँचाने में खुशी मिलती थी। क्योंकि मुझे दिखाई दे रहा था कि आस पास जो भी गलत घट रहा है, उस समय मेरे सामने वही सबसे ऊंचा चुनाव था । लेकिन फिर भी मन में बेचैनी थी क्योंकि मैं वही जॉब कर रही थी जहां मैं जाना नहीं चाहती थी ।📚 फिर मैंने निर्णय लिया कि मुझे अपना पूरा समय ऐसे काम में लगाना है, जो मेरे जीवन को सही दिशा दे और दूसरों के जीवन में भी योगदान कर सके। क्योंकि जिसने पाया है वह बांटता भी है और बांटने से ज्ञान बढ़ता है।❤️ 🌟 संस्था में आने के बाद मेरा पूरा जीवन बदल गया 🌟 संस्था में काम करना शुरू करने के बाद मेरी पूरी ज़िंदगी में बहुत बदलाव आया है। आज मुझे यहाँ काम करते हुए छह महीने हो गए हैं और मैं पहले से बहुत ज़्यादा खुश हूँ। मुझे अंदर से सुकून मिलता है कि मैं अपने जीवन का समय एक सही दिशा में लगा रही हूँ। यहाँ मैं खुद भी सीख रही हूँ और जो मैंने सीखा है, उसे दूसरे लोगों तक भी पहुँचा पा रही हूँ। मेरा आलस कम हो रहा है और मैं खुद को पहले से बेहतर बना पा रही हूँ। पहले मैं नियमित रूप से जिम भी नहीं जा पाती थी, लेकिन अब अपनी सेहत पर भी ध्यान दे रही हूँ। सबसे अच्छी बात यहाँ का माहौल है। संस्था एक परिवार की तरह है और मेंटर्स हमें बहुत अच्छे से से गाइड करते हैं। यहाँ संघर्ष तो बहुत है, लेकिन उस संघर्ष के बीच भी एक अलग ही सुकून है, क्योंकि अब मुझे समझ में आ रहा है कि मैं अपने जीवन को किस दिशा में लेकर जाना चाहती हूँ। पहले मैं खुद को लेकर इतनी स्पष्ट नहीं थी, लेकिन आज मैं अपने जीवन में सही चुनाव करने और अपनी कमजोरियों पर काम कर रही हूँ। सच में, संस्था में आने के बाद मेरे जीवन में बहुत बड़ा बदलाव आया है। मैं आचार्य जी और पूरी संस्था की दिल से आभारी हूँ कि मुझे यहाँ सीखने, आगे बढ़ने और अपने जीवन को बेहतर बनाने का अवसर मिला। 🙏❤️ संस्था में मुझे केवल काम करने का अवसर नहीं मिला, बल्कि अपने जीवन को बेहतर दिशा देने का मौका भी मिला है। यहाँ का माहौल, मेंटर्स का मार्गदर्शन और सीखने के अवसर मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। अब मुझे लगता है कि मेरा जीवन केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों तक भी सही बात पहुँचाने के काम आ सकता है। 🙏🌿 🪄जो अपने जीवन में कुछ बेहतर करना चाहते हैं, लेकिन परिवार या समाज के डर से कदम नहीं उठा पाते। कई बार हम सोचते हैं कि समाज और परिवार वाले मना करेंगे, हमें रोकेंगे या हमारा साथ नहीं देंगे। इसी डर से हम संस्था में काम करने या अपने जीवन में सही चुनाव करने से पीछे हट जाते हैं। लेकिन केवल इस डर के कारण अपने सही चुनाव को छोड़ना नहीं चाहिए। पहले खुद को समझिए, सही निर्णय लीजिए और साहस के साथ आगे बढ़िए। जब आप अपने निर्णय के प्रति स्पष्ट होंगे और अपनी जिम्मेदारी समझेंगे, तो धीरे-धीरे परिवार वाले भी आपकी बात समझते हैं और समर्थन भी करते हैं। ❤️🤝 खुद को कमजोर मत समझिए। अपने जीवन को बेहतर बनाने की शुरुआत आज से ही कीजिए। गीता सत्रों से जुड़िए, खुद को समझिए और अपने विवेक से निर्णय लेना सीखिए। 🌱 ✨ सही को पहचानिए, साहस के साथ चुनाव कीजिए और अपने जीवन को एक सार्थक दिशा दीजिए। ❤️🙏















































