
👀 पर क्या उसका शौचालय देखा? और अगर पहली प्रतिक्रिया "सरकार क्या कर रही है" थी, तो देखिए कि यह सवाल आपको कितनी सुविधा से बाहर खड़ा कर देता है। आप गवाह बन जाते हैं, और यह गवाह होना भी एक पहचान है: "मैं संवेदनशील हूँ, मैंने ख़बर पढ़ी।" 🥺कोई गवाही ही नहीं मैने और मेरे साथ के सभी बच्चों ने ये सब झेला हुआ है क्योंकि हमारे गांव के स्कूलों मेवाज भी कुछ खास परिवर्तन नहीं हुआ । आज भी प्राइमरी स्कूल 🏚️🏚️🏚️ ऐसे है जिनकी इमारत शहर के लोग देख ले तो बोले ये तो को हॉरर 🏚️🏚️ मूवी शूट करने की जग है । अगर गांव में 10 स्कूल है और 10 के 10 सरकारी है फिर चाहे वो 12th tk hi kyun न हो वो सारे ऐसे है गिरी हुई छते, गंदे और टूटे washrom, जिसमें पानी की भी सुविधा नहीं।और पीने के पानी के लिए आज भी हैंडपंप जिसका पानी इतना बदबूदार 🙊😤🤢 कि जब प्यास से लगे कि पानी न मिला तो मर जाएंगे तो हम सब नाक बंद करके पानी पीते थे ।🫠🫠🫠 घर से पानी की बोतल साथ ले जाने लगे हम सब । लेकिन कोई खास फायदा नहीं गांव की किनारे चमड़ा फैक्टरी होने 🌆🏙️🌇 पूरे गांव का पानी दूषित और हवा भी दूषित है । घर में वाटर प्योरिफायर लगाकर पानी तो साफ मिलने लगा लेकिन हवा की क्वालिटी दिन ब दिन उससे ज्यादा बुरी होती जा रही ।🤢🤢 रही बात प्राइवेट स्कूल की तो जिसके घरो की इंकम अच्छी है वहीं वहां पढ़ सकते है । पानी साफ मिल सकता है , बैठने की जगह मिल सकती है, लेकिन हवा तो वही रहेगी 😤😤वो तो नहीं बदल सकती।🥺🥺 अगर मान लीजिए कुछ km के दायरे में 10 स्कूल है तो उनमें से बस 3 ही स्कूल ऐसे होंगी जो थोड़े ठीक हालत में होंगे 🏚️🏚️ । बाकी की स्कूल की अपेक्षा । वो वही जो कि प्राइवेट स्कूल है सरकारी नहीं । हम लोगों न 10th कक्षा tk प्राइवेट पढ़ा क्योंकि उसके आगे की पढ़ाई के लिए गांव में प्राइवेट स्कूल नहीं था 🥲🥲। इसलिए आगे की पढ़ाई सरकारी कॉलेज से हुई ।🫠🫠 अब मैं उसकी भी बात बताती हूं , उसमें भी ऐसा था कि जितने दूर तक स्कूल की जगह का घेराव था वहां की सड़क तो ठीक थी वो थोड़ी बहुत ज्यादा नहीं । अगर ज्यादा बारिश हो जाए तो सड़को पर पानी भरा जाता जिसे पहने में 2 दिन लगते और बाकी का बचा 3 से 4 दिन में सूखता है। बारिश में हम लोग घुटनों तक पानी में उतरकर स्कूल पहुंचते थे । आज भि कोई खास बदलाव नहीं हुआ । स्कूल के अंदर की हालत ऐसे थे कि कक्षाओं में बंदर🐵🐵🐵 टहलते जब हम लोग 🙏🙏प्रेयर के लिए जाते तो डरते की कहीं बंदर खान खोजने के चक्कर में किताबें न फाड़ दे📚📚 , होता भी था कई बार ऐसा । जब वो बैग न खोल पाते तो बैग 🎒🎒उठा ले जाते और सारा बैग ,किताबें 📚📖अब फाड़ देते । 😑😑 पीने का पानी उतना गंदा, टायलेट जाना हो तो वॉशरूम इतना ही गंदा न कोई पानी की सुविधा नहीं । ❌❌इसलिए हम लोगों ने फिर तय किया कि अब कोई वॉशरूम नहीं जाएगा 🚽जिसे आए वो छुट्टी तक इंतजार करता और घर जाए ।🏘️🏘️ ऐसा करने से हम सभी लड़कियों की तबियत बढ़ने🏥 लगी तो पता चला toilet रोकने की वजह से तब सारी लड़कियां स्कूल के बाहर जंगल जाती थी । 🌲🌳🌴🌵 एक दिन ऐसा आया कि सभी स्टूडेंट्स ने पता लगा लिया कि गवर्नमेंट पैसा 💵💸💴💶💷💰 भेजती है ये लोग काम नहीं करते पैसा अपने पास रखते है । 👥👥👥हम लोगों ने फिर भी अपने एक अर्थशास्त्र के शिक्षक 👤की मदद से एक शिकायत📝📝✏️ पत्र लिकर प्रबंधक को भेजा ।लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ ।😿 वहां से जवाब आया कि दुबारा ऐसा हुआ तो स्कूल की तरफ से कारवाही होगी । 💀👹कुछ टाइम बाद फिर से हम लोगों ने बोला तो हम सबके नाम लिखे गए और सभी को 11th क्लास के एग्जाम में फेल करने की 😲😲धमकी दी गई। कि तुम सबका साल बर्बाद कर देंगे। 🫵🫵😡🤬 अब पीछे हट गए फिर 12th क्लास में मुश्किल से 15 से 20 स्टूडेंट्स ही सामने आए स्कूल व्यवस्था🏘️🏘️ सुधरने के लिए । 🙂🙂🙂उन सभी में मै भी थी , आखिर अंजाम वही हुआ ।🫠🫠हम सबको प्रैक्टिकल के नम्बर काट दिया । 📋📋📝📉वो शुक्र था कि बाकी के पेपर बोर्ड एग्जाम थे, 📋वरना वो लोग फेल कर देते । तभी 12th क्लास में हम लोगों के नंबर 75 % ही आए थे । बस यही थी हमारे स्कूल के टाइम की स्थिति 🥲🥲आज भी उसमें कुछ ज्यादा परिवर्तन नहीं है। 🫠🫠 जो बच्चे जाते है उनसे पूछने पर पता चला कि अब वहां ज्यादा बच्चे नहीं पढ़ते 🙇🙇। जितने हम लोगों के टाइम थे, उससे भी अब 40 % ही बचे है । 🫠🫠



















