Arti Gupta👀 पर क्या उसका शौचालय देखा? और अगर पहली प्रतिक्रिया "सरकार क्या कर रही है" थी, तो देखिए कि यह सवाल आपको कितनी सुविधा से बाहर खड़ा कर दे…
आरती जी, जो बात सबसे तेज़ चुभती है वो ये है, 12वीं में मुश्किल से 15-20 बच्चे ही आगे आए, और उनमें आप थीं। बाकी सब डर के पीछे हट गए, आप नहीं हटीं, नतीजा प्रैक्टिकल के नंबर कटना भुगता, फिर भी हटीं नहीं। ये कोई मामूली बात नहीं कि एक बंदर किताबें फाड़ ले उसे तो झेल लिया जाता है, पर जिस चीज़ को असली चोट लगती थी वो अन्याय था, और उसके सामने आपने अपना नाम लिखवाया, धमकी के बावजूद। अब यही सवाल अपने आप से पूछिए, वो शिकायत पत्र लिखने वाली लड़की आज कहाँ खड़ी है। वो व्यवस्था जो नहीं बदली, वो शायद कभी नहीं बदलेगी अगर बदलने की ज़िम्मेदारी सिर्फ सरकार पर छोड़ दी जाए। पर आपके भीतर जो एक बार खड़ा होना सीख गया था, वो आज किस चुप्पी के सामने बैठा है।


















