
स्वस्थ तंदुरुस्त शरीर होगा तो ही अंदर स्वस्थ और दंदुरुस्त मन भी होगा। इसलिए स्वस्थ शरीर के लिए ही उसके ऊपर काम करना चाहिए, ना कि स्वस्थ दिखाने के लिए, सुंदर दिखने के लिए। यह बात दिमाग में होने के बावजूद भी ज्यादा ध्यान सुंदर दिखने पर ही जाता है, ऐसा क्यों है पता नहीं। सोच ही ऐसे हो गई है कि सुंदर दिखना है। अपने से ज्यादा दूसरे क्या सोचते हैं मेरे बारे में यही विचार होने के कारण हम सुंदर दिखने पर ज्यादा ध्यान देते हैं। और सभी की सोच ऐसी होने के कारण सब लोग इस पर ज्यादा ध्यान भी देते हैं और श्रेष्ठ के लिए भी उन्हीं मापदंडों का उपयोग ज्यादा होता है। जैसे कि अपने के लिए साथी चुनना हो। अगर हम ध्यान रखें कि यह शरीर एक साधन है अपनी उच्च संभावना को प्राप्त करने के लिए, तो ही आकषर्कता, सुंदरता से ज्यादा अपने शरीर की तंदुरुस्ती स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान होगा। और सुंदर होना भी कोई खराब बात नहीं है और अगर सुंदर ना देखो, सुंदर ना हो तो कोई फर्क भी नहीं पडना चाहिए।



















