
कई बार जिन अपनों पर हम भरोसा करते है जिन्हे अपना कहते है वही हमें सबसे ज्यादा दुख देते है उससे भी बड़ा दुख तब होता है नाटक करना जैसे हमें उनका असली चेहरा जान ही नहीं पाए उनके साथ अपनी तरफ से पहले जैसा ही व्यवहार करना। हर रिश्ता हमसे किसी ना किसी स्वार्थ से जुडा होता है सब कुछ जानते हुए भी अनजान बनना बहुत दुख देता है हमारे साथ गलत करने वाले को भले ही महसूस ना हो पर अगर हम बदले मै उसे जवाब भी देते है तो हमें क्यू बुरा महसूस होता है फिर इन्ही सब विचारों पर हम अपना आने वाला दिन खराब कर लेते है की मेरी वजह से किसी को दुख हुआ इसके बावजूद की हमें पता होता है हमने सच बोला।सब कुछ जानते हुए भी हम इन आदतों को नहीं छोड़ पाते।



















