
कभी डरती थी मैं दुनिया की बातों से, कभी टूट जाती थी अपनों के आघातों से। राहें कठिन थीं, संघर्षों का दौर था, जीवन जैसे हर पल कोई कठोर प्रश्न था। फिर जीवन में आपके शब्दों का प्रकाश आया, सोई हुई चेतना ने खुद को जगाया। आपने कहा—भागना नहीं, स्वयं को जानो, झूठे सहारों से निकलकर सत्य को पहचानो। आज भी संघर्ष हैं, तूफ़ान भी आते हैं, कुछ लोग शब्दों से भी घाव दे जाते हैं। मगर अब मैं पहले जैसी कमजोर नहीं हूँ, मैं परिस्थितियों के आगे मजबूर नहीं हूँ। आचार्य जी, आपने मुझे स्वयं से मिलाया है, डर के अंधेरों से निकाल सच दिखाया है। जो जीवन कभी बोझ-सा लगता था मुझे, उसी जीवन को अब अर्थपूर्ण बनाया है आपने। मेरा आभार शब्दों में पूरा हो नहीं सकता, आपका दिया प्रकाश कभी धुंधला हो नहीं सकता। बस इतना ही कहना है श्रद्धा के साथ— आपने संघर्षों में भी दिखा दिया मुझे अपना पथ। 🙏 Happy teachers day 🥹🥹🥹✨✨✨✨✨🔥🔥📚📚📚📚📚📚📚📚📚📚📚📚📚📚📚🌿























