
अवलोकन — मैराथन का अनुभव आज RNSIT कॉलेज में आयोजित 5 किलोमीटर की मैराथन में भाग लेने का अवसर मिला। पाँच दिन पहले ही पंजीकरण कराया था। यह मेरी पहली मैराथन थी। बारिश की हल्की बूँदों के बीच दौड़ना और इतने सारे लोगों को एक साथ दौड़ते देखना एक अलग ही अनुभव था। इस अनुभव ने मुझे अपने भीतर देखने का अवसर दिया। अक्सर हम किसी काम को करने से पहले ही उसके बारे में बहुत कुछ सोच लेते हैं—समय नहीं है, तैयारी नहीं है, परिस्थितियाँ अनुकूल नहीं हैं। लेकिन जब हम वास्तव में कदम उठाते हैं, तभी पता चलता है कि हमारी धारणाएँ कितनी वास्तविक थीं और कितनी केवल मन की बनाई हुई थीं। क्या जीवन में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियों का अनुकूल होना आवश्यक है, या आवश्यक है कि हम सही दिशा में कदम उठाएँ? बारिश थी, समय कम था और पंजीकरण भी आखिरी दिनों में कराया था, फिर भी अनुभव अच्छा रहा। इससे यह समझ आया कि जीवन केवल लक्ष्य तक पहुँचने का नाम नहीं है, बल्कि अपने भीतर की झिझक, आलस्य और अनावश्यक विचारों को देखकर उनसे मुक्त होने का भी अवसर है। लेकिन एक प्रश्न और है—क्या केवल कुछ नया कर लेने से जीवन में वास्तविक परिवर्तन आ जाता है? या किसी अनुभव का मूल्य तभी है, जब हम उससे कुछ सीखकर अपने जीवन में उतारें? आज की मैराथन मेरे लिए केवल पाँच किलोमीटर की दौड़ नहीं थी, बल्कि स्वयं को देखने का एक छोटा-सा अवसर भी थी।





















