
एक अवलोकन 🪞🏝️ गोवा के आखिरी HIDP प्रोग्राम और सत्र में शामिल हुई, यह मेरे जीवन के खास पलों में से एक था, यहां अतिशयोक्ति नहीं कर रही हूं सच में😊 क्योंकि मैं सत्र से कुछ दिन पहले भीतरी अंतर्द्वंद था क्योंकि मैं गोवा पहली बार जा रही थी लेकिन जैसा मेरे मन में विचार चल रहा था उसका उल्टा हुआ। वहां जब मै गीता प्रतिभागी से मिली तो एक भी पल ऐसा नहीं लगा कि मैं इन्हें नहीं जानती।हम सब की सोच कितनी मिल रही थी। हम लोग स्कूटी से सत्रों में जाते और बाकी समय आस पास की जगह घूमने के लिए चले जाते और आखरी दिन तो हमारे पास स्कूटी नहीं था तो हम पैदल ही सत्रों के लिए निकल गए और रात को भी पैदल ही आए। जब मै इस 3-4 दिन को देखती हूं तो मुझे बहुत खुशी होती है सोचती हूं कि जब सही काम के लिए गोवा गई तो कितनी खुशी हुई अगर पूरा जीवन ही सही उद्देश्य के लिए हो तो कितना आनंद रहेगा। गोवा की सड़कों में रात को घूमना , लहरों की ध्वनि को सुनना ,वहां के हरियाली , स्वच्छ वातावरण और भजन बहुत कुछ सिखा रहा था। मुझे अपने बहुत सारे बंधनों का भी अहसास हुआ , मैं हमेशा अंजान जगहों और लोगों से दूर रहने का प्रयास करती रही,जिसकी हानि मुझे दिख रही थी। मैने बहुत से तीर्थस्थल भी गई हूं अपने परिवार के साथ ,लेकिन कभी इस तरह की शांति ही नहीं मिली जो मुझे इस गोवा सत्र में मिली। गोवा सत्र ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है मै आगे भी इस तरह के एक्टिविटी में भाग लूंगी।
































