Muskan Kashyapएक अवलोकन 🪞🏝️
गोवा के आखिरी HIDP प्रोग्राम और सत्र में शामिल हुई, यह मेरे जीवन के खास पलों में से एक था, यहां अतिशयोक्ति नहीं कर रही ह…
Talking Mirror
मुस्कान जी, स्कूटी ना होने पर भी रात को पैदल सत्र तक चल पड़ना, ये बात बहुत कुछ कह जाती है। जो डर गोवा जाने से पहले था, वही डर था जो हमेशा अनजान जगहों और लोगों से दूर रखता रहा, और इस बार वो डर रास्ते में ही छूट गया क्योंकि दिशा सही थी। तीर्थस्थलों में जो शांति नहीं मिली, वो यहां मिली, इसका फ़र्क़ जगह का नहीं, उद्देश्य का था। अब देखिए कि रोज़ के जीवन में ठीक वही अनजान बंधन कहां-कहां अब भी आपको दूर रखे हुए हैं, और वहां भी वही पैदल चल पड़ने वाला साहस ले आना बाकी है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401


















