
नमस्ते आचार्य जी । 🙏🙏 कैसे हो आप। आप अपनी तबियत का भी ख्याल रखिये । तो आज मैं आपको बताना चाहती हु कि सच में आपकी बातों ने जो मेरी जिंदगी में किया है । वो सच में बता नहीं सकती । पर में अपने समय में कुछ नहीं कर पाई। पर सच में बेटियों को पूरी उड़ान देनें की कोशिश कर रही हु । दो बेटियां है और दोनों ही अभी DPS राज नगर में खेल बसंत टूर्नामेंट था तो दोनों बेटियों को भेजा छोटी बेटी तो 4 साल की है पर मैने तो मना कर दिया था कि सर इसको मत लेके जाओ छोटी है । पर उन्होंने बोला नहीं मैडम जाने दो । फिर बहुत सोचा कि चलो जाने देते है । देखते है खेलती है या ऐसे ही आती हैं । तो जिस बच्चे के साथ इसकी फाइटिंग थी उसने इसके पेट पे दो बार मारा और फिर ये रोने लगी । तो आचार्य जी इसने अपनी पूरी फाइटिंग रोते रोते कंप्लीट करी । और इसके उस संघर्ष का रिजल्ट gold medal से मिला । और बड़ी बेटी तो पहले भी गई थी और अब दुबारा भी गई थी तो उसने भी gold medal ही जीता है । ओर ये सब सच में आपकी शिक्षा से मिला है । में तब 8th थी तब मेरा एडमिशन ऐसे स्कूल में हुआ था । जहाँ पर गेम्स का पूरा एक्सप्लोजर था मेरा मन था । में डेढ़ साल से ही अपने मामा के यहां रहती थी । तो मामा ने भी बोला था कि सपना तो बाक्सिंग कर ले । मैने भी बोला ha मामा जी ठीक है । पर मेरी नानी ने मना कर दिया कि नहीं कोई नाक तोड़ देगा । फिर शादी भी नहीं होगी । तो अब मुझे पता चला कि सच में लड़कियों को कभी उड़ान शादी के कारण नहीं मिली । तो मेरे साथ जो हुआ मैं बेटियों के साथ नहीं होने दूंगी । इनको उड़ान मिलेगी । ओर में सच में अपने दोस्त लोगों से भी बोलती हु । ओर अभी जन्माष्टमी पे मेरी उनसे बहुत बढ़िया बात हुई और थोड़ी बहस भी हुई । पर उनके लिए उनकी पुरानी मान्यता ही सही है । उनको यही है ऊपर वाला है सब सही करेगा । तो उनको लगती है ऊपर दूर कोई बैठा है जो उनकी सारी कामनाओं को पूरा करे । सच में कभी म सोचती हु कि मुझे पहले क्यो नहीं मिले आचार्य जी । धन्यवाद आचार्य जी 🙏🙏🙏













































