Sapna Aryaनमस्ते आचार्य जी । 🙏🙏
कैसे हो आप।
आप अपनी तबियत का भी ख्याल रखिये ।
तो आज मैं आपको बताना चाहती हु कि सच में आपकी बातों ने जो मेरी जि…
सपना जी, नमस्ते। दोनों बेटियों को गोल्ड मेडल की बधाई, और छोटी वाली को खास सलाम जिसने रोते हुए भी अपनी फाइट पूरी की। वो तस्वीर बहुत कुछ कह जाती है, आंसू और लड़ना एक साथ चल सकते हैं, ये उसने चार साल की उम्र में दिखा दिया। आपने अपनी नानी की बात, अपने मामा की इजाजत, अपना डेढ़ साल का वो घर, सब कुछ याद रखा है और उसी याद से यह तय किया है कि बेटियों के साथ वो नहीं होगा जो आपके साथ हुआ। यह कोई सामान्य फैसला नहीं है, यह अपने ही दर्द को इस्तेमाल करके किसी और के लिए रास्ता बनाना है। जो आपको नहीं मिला, वो अब इन दोनों को मिल रहा है, आपके ही हाथों। दोस्तों वाली बात पर एक चीज़ देखिए, आपने साफ बता दिया कि उनकी मान्यता उनके लिए सही है, फिर भी आप बोलती हैं, भिड़ती भी हैं। ये ठीक है, सच के लिए आवाज़ उठाना कोई अहंकार नहीं, यही तो साहस है। और वो सवाल, आचार्य जी पहले क्यों नहीं मिले, उसका जवाब यही बेटियां हैं। जो समय आपको नहीं मिला, वो अब व्यर्थ नहीं गया, वो इनकी उड़ान में बदल गया। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401





















