
अब मेरी बेईमानी नहीं चलेगी। कि जितना मन हुआ उतना सुन लिया, जितना मन हुआ उतना देख लिया। देखा भी, नहीं भी, सुना भी, नहीं भी। उच्चतम के साथ न्यूनतम वाला व्यवहार कर रहा हूँ मैं। और खास बात ये है कि इस स्थिति को मैंने खुद ने नहीं प्रकट किया, पता तो चल ही रहा था, परंतु नज़रअंदाज़ करने का चुनाव कर रहा था, क्योंकि ego is sovereign। पहले ऐप पर बिना खुद पोस्ट्स पढ़े, अवलोकन लिखे भी पोस्ट्स पढ़ने के लिए बस यमाचार्य के माध्यम से कुछ सेकेंड का hindrance आती थी, जिसे आसानी से पुनः नज़रअंदाज़ कर देता था मैं। पर अब पूर्ण ब्लैकआउट। क्योंकि गार्डन में घूमने वाली आवारागर्दी की जगह नहीं है कम्युनिटी। परंतु बात सिर्फ़ hindrance या अनुशासन-नियम-कायदे से ऊपर की बात है। आचार्य जी से लगातार प्रेम सुनता तो हूँ, पर समझने की कोशिश नहीं की, क्योंकि जीवन में प्रेम है नहीं और न कभी करी और न ही सीखने की कोशिश करी। आज वास्तव में आचार्य जी का प्रेम देख पा रहा हूँ। मुझे ऊँचा उठने के लिए संस्था के प्रयास को देख पा रहा हूँ। यहीं अगर मैंने इससे (अपने एनरोलमेंट राशि) कई गुना ज़्यादा किसी coaching को कीमत अदा करी होती, तो भी संस्था के इस प्रयास का वो 1% भी नहीं दिखती। अगर तयशुदा tasks, homework, attendance मैं पूरे नहीं करता, तो इसे पकड़ने के लिए वो कुछ अलग उपाय नहीं लगाते। रिश्ता-deal का उद्देश्य अलग है। मुझे मेरे हाल पर छोड़ दिया जाता। किंतु यहाँ संस्था में कुछ और हो रहा है। यहाँ जो फीस ली गई, उसके बदले equivalent value का कोई product देने का वादा नहीं किया जा रहा है। बल्कि उसे investment के रूप में लेकर हमें ही कई गुना ज़्यादा रूप में लौटाया जा रहा है। मैंने तो ये उम्मीद भी नहीं करी थी कि मेरे द्वारा rarely post करने की बेईमानी, अवलोकन न लिखने के अपराध को इतने सुंदर तरीके से सुधारने का प्रयास किया जाएगा। दिखाया जाएगी कि देखो, ये हूँ मैं और मेरी स्थिति। कम्युनिटी में ढोंग करता हूँ मैं, कम्युनिटी का कर्तव्य नहीं निभाता, जो मेरा दायित्व है। सचमुच बस कहने को नहीं, आचार्य जी ने अपनी तरफ से रिश्ता बिल्कुल प्रेम का ही रखा है और वो अपना सर्वस्व डाल चुके और उससे ज़्यादा ही किए जा रहे हैं। अब और नहीं!!! अब मेरी तरफ से ऐसा और भी चलेगा। अगर अभी दिख गया है, तो अब हर बार देखना होगा, हर बार प्रेम को चुनना होगा। रोज़ चुनना होगा। क्योंकि अब ये मेरा निजी मामला है, क्षीण तो होना ही पड़ेगा। धन्यवाद, आचार्य जी ♥️🫶🙏🙏 और संस्था का भी। इस नए तरीके के लिए कि निरंतर पोस्ट करो, तभी उपलब्ध posts पढ़ने के पात्र बन पाओगे, भाई श्रीकुमार तुम यहाँ दो बजे।



















