
आचार्य जी अभी आपकी एक वीडियो देखी । जो लगभग 4 साल पहले सुनी थी उसे देखकर कुछ याद आ गया । मैं इस वीडियो को अक्सर ढूँढ़ती थी और आज इसे एक गीता पार्टिसिपेंट के स्टेटस पर देखा। इसमें जब आचार्य जी ने एक शब्द बोला, “चुनाव” तो यहाँ आकर मैं कुछ बातों पर अटक गई। मुझे चुनाव का मतलब बस “इलेक्शन🤭” पता था। “चुनाव” शब्द तो सुन रखा था, लेकिन इसके अर्थ पर कभी ध्यान ही नहीं गया था। कपड़े चुन लिए, खाना चुनो , बस इतना ही पता था। और देखना, आचार्य जी ने जो शब्द बताया, “देखना यानी खुद को देखना”, यह शब्द भी मेरे लिए बस इतना ही था कि बाहर देख लो, टीवी देख लो , यूट्यूब देख लो , बस। आत्मज्ञान तो बहुत ही दूर का शब्द था। अगर कभी सुना भी था, तो उसका अर्थ बस इतना था, आत्मा का ज्ञान। अहंकार के बारे में भी बस इतना पता था कि अहंकार यानी घमंड। ईमानदारी के नाम पर बस इतना पता था कि “ईमानदारी सबसे अच्छी नीति है।” लेकिन किसके प्रति ईमानदारी और किसके लिए ईमानदारी, यह पता ही नहीं था। और “किसके लिए?” का प्रश्न तो बहुत ही दूर की बात थी। आचार्य जी नहीं मिलते तो शायद ये बातें कभी पता ही नहीं चलती। विद्या का अर्थ तो स्कूलों की पढ़ाई था । और अविद्याभी होती है ,ये तो बहुत दूर की बात थी। उपनिषद, उनके बारे में तो पता ही नहीं था। हां कहीं से वेदों के बारे में सुन लिया था। सोचा कभी वेद पढूंगी तो शायद ज्ञानी बन जाऊं । संत कबीर साहब के बारे में भी “बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलया कोय, जो मन खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय”, इन सब दोहों के अर्थ ऊपर-ऊपर से कर लिए थे। मेरे लिए संतों का मतलब बस परीक्षा पास करने के लिए पढ़ना था। श्री कृष्ण का मतलब ..जन्माष्टमी का व्रत ,रास लीला की कहानियां और पेड़े खाना था । बाद में लड्डू गोपाल की सेवा भी हो गया था। मैंने कभी सोचा ही नहीं था कि संत हमें प्रेम सिखाने के लिए आए हैं, वो हमें आईना दिखाकर हमें बेहतर बनाने के लिए आए हैं। मेरी जैसी लड़की सच में इतना बदल जाएगी, यह तो एकदम ही हैरान करने वाली बात है। कहाँ मैं अपने घर से नहीं निकलती थी और अब अकेले बुक स्टॉल लगा लेती हूँ, वहाँ खड़ी रहती हूँ, अभी सप्ताहांत में ही लगाती हूँ। बहुत अजीब है सब कुछ। आश्चर्य है, सच में। मुझे खुद को देखकर भी कई बार आश्चर्य होता है ।😅 दूसरे बोलते हैं, “तुम कितनी बदल गई हो। तुम वह हो ही नहीं जो पहले थीं।” उनके मुँह से सुनती हूँ तो उतना नहीं लगता, लेकिन फिर सोचती हूँ, हाँ, कैसे? आप जानते हैं इस मिशन के बारे में , ये मिशन कहाँ तक जा रहा है, लेकिन शायद जितना आपने सोचा होगा, इसका असर उससे कई गुना ज़्यादा आम ज़िंदगी पर हो रहा है। आचार्य जी अपने कहा था किचन में एक महिला का जीवन बदल रहा है वो किसी को नहीं दिखेगा। मेरा जीवन भी वैसे ही है। और लिखते - लिखते फिर आँखें नम हो गई ,पता नहीं क्यों ? 🥹 बहुत - बहुत धन्यवाद आचार्य जी !♥️🥹














































