
Sandhya chourey
तुम सरल हो ! बिल्कुल ऐसा ही शायद हम सभी के साथ है।इतने ऊंचे शब्दों को हम ऐसे ही अर्थ में लेते थे। आचार्यजी ने हमे एक नई और ऊँची दृष्टि दी है!
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तुम सरल हो ! बिल्कुल ऐसा ही शायद हम सभी के साथ है।इतने ऊंचे शब्दों को हम ऐसे ही अर्थ में लेते थे। आचार्यजी ने हमे एक नई और ऊँची दृष्टि दी है!
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