
STUDENT OF WISDOM UNIVERSITY पढ़ने का शौक मुझे हमेशा से है, और मौका भी मिलता गया तो मैं पढ़ती रही। मुझे साइंस और मैथ्स यही दो सब्जेक्ट सबसे ज्यादा पसंद है तो मुझे मैंने यहीं सब्जेक्ट ज्यादा पढे फिर मैंने मास्टर्स भी साइंस में किया। शौक था इसलिए पढ़ती रही, पर मुझे कभी नहीं पता था कि मैं जो पढ़ रही हूं, वह क्यों पढ़ रही हूं। मास्टर्स के बाद मैंने रिसर्च भी किया और पीएचडी भी कंप्लीट की, लेकिन इतना सब कुछ मैंने किया तो बस अपने आसपास के माहौल के प्रभाव में ही किया। रिसर्च क्या है, क्यों करनी चाहिए यह तो मुझे पता था। लेकिन मुझे यह नहीं पता था कि मैं यह क्यों कर रही हूं, फिर लोगों को एग्जाम की तैयारी करते हुए देखा लेक्चर बनते हुए देखा तो मैंने भी तैयारी की एग्जाम की पर मैं कभी भी वह एक्जाम क्रैक नहीं कर पाई। मैं जो भी कुछ कर रही थी वह मेरी मौलिकता से नहीं आ रहा था मैं बस लोगों के प्रभाव में आकर सब किए जा रही थी इसलिए मुझे यह सब करने में कभी खुशी नहीं मिली। रिसर्च भी किया उसके पीछे मेहनत भी बहुत लगी लेकिन जब मुझे एचडी की डिग्री मिली तो मुझे कोई खुशी नहीं हुई। उल्टा जितनी परेशानियां मैंने उसे डिग्री आपको हासिल करने के लिए झेली थी। वह मंजिल पर पहुंच कर मुझे बहुत व्यर्थ लगने लगी। जब वह डिग्री मेरे हाथ में आई तो मुझे लगा कि ऐसा क्या था इस एक कागज में जिसको हासिल करने के लिए मैं इतनी परेशान हुई, और बस इसके पीछे भागे जा रही थी। एक पेपर ही तो हाथ में आया है जिंदगी तो मेरी वैसी की वैसी ही थी। मैं भी वही रही इस पूरी यात्रा के दौरान। जो बदलाव मैं अपने जीवन में या अपने भीतर चाहती थी वह तो मुझे नहीं मिला और मुझे उन सब लोगों पर गुस्सा आया जो मुझे कहते थे कि,एक बार डिग्री मिल जाएगी तो तुम्हारी जिंदगी बदल जाएगी कितना झूठ बोलते थे सब क्यों झूठ बोलते हैं हमारे बड़े हमसे, क्यो? खैर जिंदगी फिर भी चलती रही। इसके बाद भी मैंने कुछ कोर्सेज और ज्वाइन किये। कुछ सीखने की कोशिश की कुछ समझने की कोशिश की लेकिन वह पढ़ाई, वह शिक्षा जो मैं गृहण करना चाहती थी जो मैं अपने जीवन में चाहती थी हमेशा से वह मुझे कहीं से नहीं मिली। मुझे दर्शनशास्त्र में भी रुचि रही हमेशा से तो मैं अपनी जिंदगी में कुछ ऐसा पढ़ना चाहती थी जो मेरी अपनी मौलिकता से निकल रहा हो, जो मेरे भीतर के किसी केंद्र से निकल रहा हो जो मुझे मुझ तक पहुंचा दे। कंपटीशन एग्जाम की तैयारी के दौरान भी मुझे यह एहसास हुआ कि इतना कुछ है जानने के लिए आप नहीं जान सकते सब कुछ, एक फ़िल्टर आपको खुद लगाना पड़ता है कि क्या है जो आपके लिए जानना जरूरी नहीं है। क्योंकि सब कुछ तो आपके लिए जानना जरूरी नहीं है हमारा दिमाग कोई डस्टबिन तो है नहीं, की सारी सूचना डाल दो तो एक फ़िल्टर बहुत जरूरी है जो यह तय कर सके कि दिमाग के अंदर क्या नहीं जाना चाहिए तो वह फिल्टर मुझे आखिरकार मिल गया प्रशांत फाउंडेशन के रूप में। मुझे 1 साल हो गया है कम्युनिटी पर तो मैं कोशिश करती हूं कि मैं ज्यादा से ज्यादा पोस्ट कम्युनिटी पर पढू, अभी जो विद्या- अविद्या वाली पोस्ट है। वह वाकई में बहुत बेहतर तरीके से मेरी उसे इच्छा को पूरी कर रहा है जो मैं हमेशा से चाहती थी। इस ऐप पर जितनी भी जानकारी है वह हर व्यक्ति के लिए बहुत जरूरी है। इतिहास, राजनीति विज्ञान अर्थशास्त्र और सूचना प्रौद्योगिकी जो मैंने कभी बहुत ज्यादा गहराई से नहीं पढे, आज आचार्य जी से पढ़ रही हू,और सच में इन सबको पढ़ने में बड़ा आनंद आ रहा है। आज भी मुझे नहीं पता कि मैं क्यों पढ़ रही हूं लेकिन बस पढ़ने में अब और ज्यादा मजा आ रहा है। वह जिंदगी जो मैं हमेशा से जीना चाहती थी शायद थोड़ी थोड़ी ही सही उसकी झलक दिख रही है मुझे अपने जीवन में। so good spirituality=good economics = good life मेरी जिंदगी तो बहुत ज्यादा बदली इस 1 साल में। शायद मेरा नजरिया ही बदल गया है और कुछ हद तक मैं भी। 🙏








































