
मुझे सीरियल बहुत अच्छा लगता था मैं कक्षा 6 वीं से कक्षा 9वीं में थी, सन 2006 ,2009 उस समय बहुत सारी सीरियल आते थे जैसे कुमकुम ,कसौटी जिंदगी की वो रहने वाली महलों की उसके बाद ये रिश्ता क्या कहलाता है, जैसे सीरियल मैने खूब देखी है, और बच्चों का मनपसंद सोन परी, सक लक bum bum, हातिम, विग्राल गबराल , श श श कोई है, रामायण, महाभारत, जेसे बहुत सारी सीरियल आते थे उन सभी सीरियल को देखती थी घर में टीवी नहीं था तो दूसरे के घर जाकर देखती थी जबकि उस समय पढ़ाई मेरे लिए बहुत ज़रूरी था पर घर में कोई पढ़ाई करने के लिए नहीं बोलता और न ही स्कूल में ज्यादा पढ़ाई का माहौल था , फिल्म भी पारिवारिक हम साथ साथ है और रोमांटिक मुवी अच्छी लगती थी। पर रियल लाईफ में ऐसा नहीं होता लेकिन ये सब देख कर एक काल्पनिक जीवन की छवि मन में आती थी सबके घर इस होना चाहिए,मेरी शादी 2021 में हुई लोगों की देखा देखी में मैंने शादी कर ली थी जिससे मेरी बेचैनी और बढ़ती गई फिर एक फिल्म के शॉर्ट्स मोबाइल में मैंने देखा mrs. जिसे देखने पर मेरी ही कहानी लगी वही बेचैनी वही कुछ करने की चाहत उसने जो फ़ैसला लिया वही फ़ैसला मैंने भी लिया, उस फिल्म में जिस तरह वो लड़की अपने ससुराल से भाग जाती है मैंने भी वही किया, पर केवल फिल्म देखकर ये सब करना मेरे लिए उतना आसान नहीं था आचार्य जी को you tube me सुनती थी तो समझ में आने लगा कि मुझे किया करना चाहिए आचार्य जी बोलते है जो सही है वो करो भले ही समाज उसे कुछ भी बोले अच्छे कम को रोते हुए करो तो मैंने वही किया, फिर मैने उनके गीता सत्रों में जुड़ी और थोड़ी थोड़ी स्पष्टता आ रही है जिसमें उन्होंने कहा था पैसे भले ही थोड़े ही कमाओ पर पैसे अपना होना चाहिए तो मैंने स्कूल में पढ़ना चालू किया, पैसे ठीक समय पर नहीं मिलते तो वही बेचैनी बनी रहती है काम तो करना शुरू की हु पर पैसों की चिंता बनी रहती है।



















