
🌱 जिस बात को मैं सही मानता हूँ, उसे परखना चाहता हूँ, या केवल उसकी पुष्टि चाहता हूँ? और अपनी धारणाओं को जाँचने में मैं कहाँ रुक जाता हूँ? हाँ, परखना चाहती हूँ, लेकिन परखने के लिए सही दृष्टि भी होनी चाहिए और वो दृष्टि आचार्य जी से मिल रही है। जहाँ अहंकार के हटने की ( खुद के स्वार्थ की ) बात आ जाती है वही पर मै अपनी धारणाओं को जांचने में रुक जाती हूँ।



















