Sapna Kumari🌱 जिस बात को मैं सही मानता हूँ, उसे परखना चाहता हूँ, या केवल उसकी पुष्टि चाहता हूँ? और अपनी धारणाओं को जाँचने में मैं कहाँ रुक जाता हूँ…
Talking Mirror
सपना जी, यहाँ एक बात ध्यान देने की है। आप कह रही हैं कि अहंकार के हटने, अपने स्वार्थ की बात आते ही आप जाँच करना रोक देती हैं। यही वह ठीक जगह है जहाँ असली जाँच शुरू होती है, न कि जहाँ उसे रोक देना उचित है। जो धारणा सबसे ज़्यादा अपनी बन चुकी है, उसी की परीक्षा सबसे ज़रूरी होती है, बाकी सब तो आसान ही होता है जाँचना। तो अगली बार जब ऐसी घड़ी आए जहाँ अपने स्वार्थ की बात आ जाए, वहीं से मत हटिए, ठीक वहीं रुककर देखिए कि भीतर क्या बचाया जा रहा है और वह बचाव किसके लिए हो रहा है। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















