
जी, मैं भी कुछ साल पहले तक चांद पर जाने की सोचा करती थी। लेकिन उसके बाद जीवन ने दिखाया कि हम किस तरीके से पृथ्वी से जुड़े हुए हैं, हमारी नसों में रक्त का दाब और पृथ्वी पर वायुमंडल का दाब एक ही है। हमारे शरीर में जो भी तत्व है, वह सभी पृथ्वी पर पहले से ही मौजूद है। यहां तक की हम रोजमर्रा के जीवन में जो भी चीज प्रयोग करते हैं वह सब भी पृथ्वी से ही प्राप्त चीजों से ही बनती है, जैसे- कपड़े, घर, खाना, गाड़ी, गाड़ी में डलने वाला तेल, औषधीयां और पैसा कमाने के लिए भी हम जो चीजें क्रिया- विक्रिया करते हैं या किसी भी तरीके से पैसा कमाना चाहते हैं वह भी सीधे हम प्रकृति/पृथ्वी से ही लेते हैं। फिर समझ आया कि भगवान से कुछ भी मांगना बेवकूफी है, क्योंकि हमारे पास तो पहले से ही सब कुछ है। लेकिन फिर भी अहंकार यह सब देखने की बजाय बाहर की ओर देखता है और समझता है कि वहां कुछ अलग है, वहां कुछ ऐसा है जिससे उसे संतुष्टि मिल जाएगी। लेकिन अगर वह अपनी स्थिति को थोड़ा रुक कर देख ले कि उसे क्या चाहिए तो उसे समझ आ जाएगा कि जो उसे चाहिए वह तो पहले से ही उसके पास है।



















