
✍🏻 पोस्ट 1 | 13 अक्टूबर '26 💭 विषय — इंडियन करंट अफ़ेयर्स ──────── Gen Z की नवरात्रि! नवरात्रि, देवी दुर्गा से सीखने का पर्व है। लेकिन क्या हम इसके मर्म को समझ रहे हैं, या यह अहंकार की भेंट चढ़ता जा रहा है? 📰 NDTV की हाल ही की रिपोर्ट के अनुसार, अहमदाबाद में कुछ लोग गरबा से पहले ऊर्जा और त्वचा में निखार पाने के लिए IV ड्रिप लगवा रहे हैं। 💉 एक सत्र की कीमत ₹4,000 से ₹10,000 है, जबकि कुछ पैकेज ₹15,000 तक पहुँचते हैं। इनमें विटामिन C, B-कॉम्प्लेक्स, जिंक और ग्लूटाथियोन जैसे पदार्थ शामिल हो सकते हैं। ⚠️ त्वचा का रंग हल्का करने के लिए IV ग्लूटाथियोन की प्रभावशीलता और सुरक्षा के पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इस विषय पर PubMed में शोध-समीक्षा भी प्रकाशित हुई है। 🪞 सवाल सिर्फ़ IV ड्रिप का नहीं, बल्कि उस चाहत का है जो हमें इसकी ओर ले जाती है। यहाँ सवाल यह है कि क्या हम देवी दुर्गा के पर्व से अपने भीतर की प्रवृत्तियों को पहचानने और उन पर विजय पाने की सीख भी लेते हैं? जब हमारी छवि ही हमारी पहचान बन जाती है, तो अपना स्वाभाविक शरीर पर्याप्त नहीं लगता। हम सुंदर दिखने, दूसरों से बेहतर नज़र आने और उनका ध्यान आकर्षित करने में लगे रहते हैं। उत्सव में शामिल होने के लिए भी हम अपने शरीर को दूसरों की नज़रों के अनुरूप ढालने लगते हैं। 📖 बल्कि दुर्गा सप्तशती में देवी और असुरों के संघर्ष को अपने भीतर की प्रवृत्तियों को पहचानने और समझने के एक रूपक के तौर पर भी देखा जाता है। 🌍 आज के असुर हम स्वयं हैं, जो अपनी इच्छाओं और भोग-विलास के लिए प्रकृति को तबाह कर रहे हैं। जब देवी सभी असुरों का संहार कर देती हैं, तो उसका परिणाम क्या होता है? 💬कहा जाता है कि प्रकृति में जो भी असंतुलन था, वह दूर हो गया। नदियाँ सिकुड़ गई थीं और अपने मार्ग से भटक रही थीं। 🌊नदियाँ फिर अपने मार्ग पर लौट आईं और पूरी धार के साथ बहने लगीं। उनका जल स्वच्छ हो गया। आकाश पर छाए धूल के बादल छँट गए और सूर्य की प्रभा अपने पूरे ओज के साथ बिखरने लगी। 🌿 आज प्रकृति में असंतुलन पैदा करने वाली हमारी प्रवृत्तियों को देखना भी ज़रूरी है। 🌎पृथ्वी बढ़ते तापमान, प्रदूषण, जंगलों के विनाश और जैव-विविधता के नुकसान जैसे संकटों का सामना कर रही है। हमारी उपभोग की आदतें भी इन संकटों से जुड़ी हैं। जिस प्रकृति को हम माँ दुर्गा के स्वरूप से जोड़कर पूजते हैं, उसके प्रति हमारा व्यवहार कैसा है? क्या हम अपनी इच्छाओं में इतने उलझे हुए हैं कि उनके परिणामों को देखना ही भूल जाते हैं? 🌺 नवरात्रि केवल देवी का उत्सव मनाने का अवसर है, या अपने भीतर की प्रवृत्तियों को पहचानने का भी? ❓ क्या हम उस लालसा को पहचानने के लिए तैयार हैं, जो हमें लगातार अधिक पाने और दूसरों से बेहतर दिखने के लिए प्रेरित करती है? ────────── 🔗 स्रोत: NDTV https://www.ndtv.com/ahmedabad-news/why-ahmedabads-gen-z-is-paying-up-to-rs-15-000-for-iv-drips-ahead-of-navratri-12159872 https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/39444151/














































