
Savitri dansena
सवाल यह है कि क्या हम देवी दुर्गा के पर्व से अपने भीतर की प्रवृत्तियों को पहचानने और उन पर विजय पाने की सीख भी लेते हैं? जब हमारी छवि ही हमारी पहचान बन जाती है, तो अपना स्वाभाविक शरीर पर्याप्त नहीं लगता। हम सुंदर दिखने, दूसरों से बेहतर नज़र आने और उनका ध्यान आकर्षित करने में लगे रहते हैं। उत्सव में शामिल होने के लिए भी हम अपने शरीर को दूसरों की नज़रों के अनुरूप ढालने लगते हैं।


















