
16 अगस्त को गोवा में Weekend With Master शिविर के दौरान आचार्य जी के साथ संत सरिता सत्र का आयोजन हुआ। यह सत्र सुबह चली HIDP (Holistic Individual Development Program) की ऐक्टिविटीज़ के बाद हुआ। संत कबीर साहब की वाणी - “धर्म अधर्म तंह किछु नाहिं, संजम नियम आचारा” - पर आधारित इस सत्र में आचार्य जी ने धर्म, संयम और आचरण की गहन व्याख्या की। सत्र में आचार्य जी ने बताया कि दो इंसानों के बीच असली फर्क उनकी परिस्थितियों या बाहरी व्यवहार से नहीं, बल्कि उनकी भीतरी हालत से होता है - अहंकार या तो खुद को बचाने का चुनाव करता है या खुद को गलाने का। उन्होंने समझाया कि सच्चा संयम किसी नियम का अभ्यास या बाहर से ओढ़ा हुआ आचरण नहीं, बल्कि भीतर की ईमानदारी और प्रेम से सहज रूप से प्रकट होता है। बाहरी गुणों का प्रदर्शन करने के बजाय भीतर के अहंकार को देखना ही वास्तविक साधना है। सितंबर में गोवा में हर वीकेंड Weekend With Master शिविर आयोजित हो रहे हैं। आगामी शिविर 19-20 सितंबर और 26-27 सितंबर को होंगे। अक्टूबर में ये शिविर दिल्ली-एनसीआर में जारी रहेंगे।

































