
✍🏻 पोस्ट 7 | 4 अक्टूबर '26 💭 विषय — फिल्में/गीत/पुस्तकें/कला ───────────── 🤔 हम विचार से इतना चिपके क्यों रहते हैं? 🗿 द थिंकर दुनिया की सबसे प्रसिद्ध मूर्तियों में से एक है। इसे फ्रांसीसी मूर्तिकार ऑगस्ट रोडिन ने 1880 के दशक में बनाया था। आपने इसे किसी संग्रहालय, कार्टून या लोगो में ज़रूर देखा होगा। यह एक हृष्ट-पुष्ट पुरुष की मूर्ति है, जो झुककर बैठा है। उसकी ठोड़ी मुट्ठी पर टिकी है और वह गहरे विचार में डूबा हुआ दिखाई देता है। 🚪 इसकी शुरुआत कहाँ से हुई? रोडिन ने इसे शुरुआत में एक स्वतंत्र मूर्ति के रूप में नहीं बनाया था। वह इसे द गेट्स ऑफ हेल नामक एक विशाल द्वार के ऊपर स्थापित करने वाले थे। इस रचना की प्रेरणा इतालवी कवि दांते की डिवाइन कॉमेडी से मिली थी। मूर्ति में बैठा व्यक्ति मूल रूप से दांते को दर्शाता था, जो नीचे देखते हुए अपनी कविता और उसके संसार के बारे में विचार कर रहा है। 🤔 फिर यह सिर्फ़ दांते की मूर्ति नहीं रही। बाद में रोडिन ने इस आकृति का एक बड़ा रूप बनाया और उसे अकेले प्रदर्शित किया। अब उसके आसपास न विशाल द्वार था, न दांते की कहानी का संदर्भ। इसलिए लोगों ने उसे किसी एक व्यक्ति के रूप में देखना बंद कर दिया। वह धीरे-धीरे मनुष्य के सोचने का सार्वभौमिक प्रतीक बन गई। 1906 में इसका एक कास्ट पेरिस के पैंथियॉन के सामने स्थापित किया गया। इसे किसी विशेष व्यक्ति के बजाय विचार और चिंतन के स्मारक के रूप में प्रस्तुत किया गया। बाद में 1922 में इसे म्यूज़े रोडिन ले जाया गया। 💪 वह इतनी तनावपूर्ण मुद्रा में क्यों है? द थिंकर आराम से बैठे किसी विद्वान की तरह नहीं दिखता। उसकी भौंहें सिकुड़ी हुई हैं। पैर की उंगलियाँ मुड़ी हुई हैं। पीठ और शरीर की मांसपेशियों में तनाव है और मुट्ठी मुँह से लगी हुई है। उसकी दाहिनी कोहनी बाएँ घुटने पर टिकी है, जिससे पूरा धड़ एक तरह के खिंचाव में दिखाई देता है। रोडिन केवल चेहरे से विचार दिखाना नहीं चाहते थे। वे चाहते थे कि पूरा शरीर सोचता हुआ दिखाई दे। इसीलिए यहाँ विचार करना भी एक तरह के शारीरिक श्रम जैसा लगता है। मूर्ति का नग्न, हृष्ट-पुष्ट शरीर भी महत्वपूर्ण है। वह किसी रोब पहने विद्वान की तरह नहीं, बल्कि संघर्ष करते हुए मनुष्य की तरह दिखाई देता है। इस दृष्टि में माइकलएंजेलो की गंभीर और चिंतनशील आकृतियों का प्रभाव भी देखा जाता है। 🌍 इसे कहाँ-कहाँ देखा जा सकता है? रोडिन के स्टूडियो ने द थिंकर के कई कास्ट बनाए, इसलिए आज इसकी कई प्रतिकृतियाँ दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद हैं। 📍 म्यूज़े रोडिन, पेरिस 📍 स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, कैलिफ़ोर्निया 📍 क्लीवलैंड म्यूज़ियम ऑफ़ आर्ट, ओहायो इसके अलावा द थिंकर के कास्ट दुनिया के कई अन्य संग्रहालयों और विश्वविद्यालयों में भी हैं। 🧠 द थिंकर एक रहस्य को खोलता है। अगर यह किसी रोब पहने बुद्धिजीवी की आकृति होती, तो शायद ही यह बात हमारे सामने खुलती। इस मूर्ति में थिंकिंग यानी सोचने को भी शारीरिक क्रिया के तौर पर दिखाया गया है। पूरी मूर्ति में वह तनाव दिखाई देता है, जैसे कोई भारी पत्थर ढो रहा हो। विचार भी शरीर है। और इससे एक और गहरी बात खुलती है। 💭 अहंकार विचार को खाता है, क्योंकि यह एक जबरदस्त क्षमता है, जिससे उसकी बहुत-सी कामनाएँ पूरी होती हैं। आप थोड़ी देर के लिए विचार में ही अपनी कामना पूरी कर लें, तो भी खुश हो जाते हैं। वैसे ही विचार में किसी भयावह बात का स्मरण कर लें, तो डर भी जाते हैं। अहंकार विचार से चिपका रहता है और उससे और प्रबल होता जाता है। यह एक ऐसा विषय है जो बिना ज़्यादा कष्ट उठाए अहंकार को पुष्टि देता है। 📖 यह बात सिर्फ़ जान लेने की नहीं है। इसे कसौटी की तरह इस्तेमाल कीजिए। वो कौन-कौन सी कामनाएँ हैं, जिन्हें पूरा करने के लिए आप विचार से चिपके रहते हैं? और कहीं ऐसा तो नहीं कि इसी के कारण आप अपनी ही दुर्दशा कर रहे हैं? स्रोत: https://www.musee-rodin.fr/en/musee/collections/oeuvres/thinker















































