
इक ऐसी मान्यता या पम्परा जो मुझे जानकार बहुत बुरा लगा। पर मजबूर और इक भय। जिसके कारण अपने अंदर की भाव को दबाना पड़ा। मेरा विवाह 2015 में हुई। मै नई नवेली दुल्हन, ससुराल की मान्यता थी की जब घर में सादी होकर दुल्हन आती हैं तो कुल देवी को बली दी जाती हैं सूअर के बच्चे की। जिसे दुल्हन के पिता पैसा देते हैं बच्चे को खरीदने की। और सूअर के बच्चे को चिकवा (जो जानवरो को मारकर बेचते हैं।) मारकर मंदिर में चढ़ाता हैं और अपने घर ले जाकर खा जाता हैं। परम्परा पूरी हो जाती हैं। इस काम को जो नहीं करते उनके घर में कुलदेवी नाराज हो जाती हैं। इस परंपरा से मै बहुत दुखी हुई और मैंने दूसरे दिन ही बहस किया अपने पति से समझया भी। की हम कैसे सुखी रह सकते हैं किसी जीव की हत्या करके। पर उन्हों ने नहीं माना। और मुझे ज्यादा दीठ भी बोला गया। मै चुप हो गयी। मेरा भय मुझे रोकने नहीं दिया। पर जब भी बात होती हैं इस परम्परा की तो खूब बहस करती हूं। चाहे कुछ भी हो जाये। होने नहीं दूंगी।



















