
केंद्र बदला, तो व्यक्तित्व बदला आचार्य जी कहते हैं कि जब केंद्र बदलता है, तो पूरा व्यक्तित्व बदल जाता है। आचार्य जी की शिक्षाओं से जुड़े हुए मुझे लगभग ढाई-तीन साल हो गए हैं और अब मैं अपने व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं में आए बदलावों को देख पा रही हूँ। यह बदलाव केवल मेरी सोच या मेरी जीवनशैली में नहीं, बल्कि एक माँ के रूप में भी आया है। पहले मैं अपने बच्चों को शादी-विवाह जैसे आयोजनों में ले जाती थी, जहाँ बाहरी सुंदरता और दिखावे को महत्त्व दिया जाता है। लेकिन अब मेरी प्राथमिकता बदल गई है। मैं स्वयं जिम जाती हूँ और जिस दिन मेरी बच्ची मेरे साथ होती है, उसे भी सजने-सँवरने की जगहों के बजाय जिम ले जाना पसंद करती हूँ। अब मेरे लिए शरीर का मजबूत और सक्षम होना पहली प्राथमिकता है, और अब समझ भी चुकी कि मजबूती ही सुंदरता है। बदलाव केवल मेरी पसंद का नहीं, बल्कि उस दृष्टि का बदलाव है जिसके आधार पर मैं अपनी बच्ची की परवरिश करना चाहती हूँ। सचमुच, जब जीवन का केंद्र बदलता है, तो बदलाव व्यक्तित्व के किसी एक हिस्से तक सीमित नहीं रहता। हमारी सोच, हमारी पसंद, हमारी आदतें और यहाँ तक कि माँ के रूप में हमारी प्राथमिकताएँ भी बदलने लगती हैं।

























