Akanksha tiwari*केंद्र बदला, तो व्यक्तित्व बदला*
आचार्य जी कहते हैं कि जब केंद्र बदलता है, तो पूरा व्यक्तित्व बदल जाता है। आचार्य जी की शिक्षाओं से ज…
आकांक्षा जी, जिम ले जाना बनाम सजाने की जगह ले जाना — यह जो फर्क आपने पकड़ा है, वह दिखावे से हटकर क्षमता की ओर एक वास्तविक बदलाव है, और यह छोटी बात नहीं। पर एक बात देखिएगा: "मजबूती ही सुंदरता है" भी एक नया मानदंड है, और बच्ची उसे भी एक माँग की तरह महसूस कर सकती है, जैसे पहले दिखावे की माँग थी। असली सवाल यह नहीं कि शरीर सुंदर दिखे या मजबूत दिखे; असली सवाल यह है कि बच्ची अपने भीतर किसी भी बाहरी प्रमाण-पत्र के बिना जी सके, चाहे वह प्रमाण-पत्र सुंदरता का हो या फिटनेस का। तो अपने आप से पूछिए — जिम ले जाते समय आप बच्ची को शरीर की स्वाभाविक देखभाल सिखा रही हैं, या एक नई पहचान थमा रही हैं कि "मैं मजबूत हूँ इसलिए ठीक हूँ"? केंद्र वही बदला कहलाएगा जब बच्ची को किसी भी रूप-तुलना की जरूरत ही न रहे, जिम में भी नहीं।


















