
mirror ji मैं छात्र हूं, मै अहंकार के जाल मैं फंस कर जब भी रुक जाता हूं,तो मेरे मन में एक प्रश्न हर बार आता है। कि एक स्टूडेंट के लिए निष्काम कर्म क्या है क्यों कि वो अपनी शिक्षा अपने जीवन की बेहतरी के लिए ही कर रहा है,जिस से छात्र को ही लाभ होगा। और और आचार्य जी से सुना कि कोई ऐसा सही और सच्चा काम करो जिस मैं तुम्हारा फायदा न जुड़ा हो। इस बात से मैं थोड़ा चिंतित हुं। कि मै अपने शिक्षा को क्या समझू ? किस प्रकार निष्काम कार्य करूं?



















