
माउंटेन ट्रेकिंग 🌄 पिछले लगभग एक महीने से स्वयं को माउंटेन ट्रेकिंग के लिए तैयार कर रही थी। यह ट्रिप और ट्रेकिंग 10 दिनों की थी परंतु इससे पहले कई ट्रायल हुए । जिनमें कुछ में तो कलेजा मुंह को आ गया । टाइमलाइन दौड़ में तो अंदर से रोना आ रहा था । पैरों का दर्द तो सतत चलता ही रहा । सुबह 4:30 से सफर शुरू होता था और 2 घंटे तक लगातार शारीरिक फिटनेस संबंधी गतिविधियां करवाई जाती थी। हर रोज लगता था क्यूं झेल रही है इतनी पीड़ा, जबकि यह अनिवार्य नहीं बल्कि स्वैच्छिक था । यह पहली बार था जब खुद को शारीरिक फिटनेस के तल पर परखा। स्वयं को कई स्तरों पर कमजोर पाया और काम करना शुरू किया। कम्यूनिटी के ही एक सदस्य राहुल जी से भी वीगन डाइट संबंधी सुझाव लिए। ऊंचे ऊंचे पहाड़ और गंगा के उत्पत्ति स्थल का नजारा अद्भुत था । शांत और मजबूत पहाड़ ठहरने पर विवश कर रहे थे। सतत बहती भागीरथी और अन्य नदियां किसी जगह रूक जाने को प्रतिबंधित करती प्रतीत हो रही थी। पानी इतना साफ की नदियों से सीधे ले रहे थे। पहली बार कुछ दिनों तक आउट औफ नेटवर्क रहने का अनुभव भी सुकून देने वाला था यहां तक की नेटवर्क में आने के बाद भी किसी अपने से बात करने की कोई जल्दबाजी नहीं थी। माउंटेन लाईफ ने जरूरत और विलासिता के बीच के अंतर को भी बारीकी से समझाया । मेरे लिए यह सफर 2024 में आचार्य जी के आने से जिंदगी की एक नई परिभाषा से ही उपजा था जिसमें सुरक्षा को दरकिनार करते हुए चुनौतियों को निमंत्रण देना ही जीवन का पर्याय बन गया था । मैंने पहले दिन ही खुद से कहा था कि मैं खुद से पीछे नहीं हटूंगी, बेशक यदि मैं इनके क्राईटेरिया को पूरा नहीं कर पाती तो ये लोग ही मुझे निकाल दे। जब जब लगा बहुत दर्द हो रहा है तब दर्द और दुःख के बीच के अंतर को समझने का प्रयास किया। आचार्य जी दर्द के क्षणों में हमेशा जहन में थे कि पीछे हट गई तो क्या मुंह दिखाएगी । जिंदगी में अब यही बेपरवाही अच्छी लगने लगी है। कोई डर नहीं चोट लगेगी या दर्द होगा बस जहन में यही रहता है जो होगा देखा जाएगा।












































