Santosh Choudharyमाउंटेन ट्रेकिंग 🌄
पिछले लगभग एक महीने से स्वयं को माउंटेन ट्रेकिंग के लिए तैयार कर रही थी।
यह ट्रिप और ट्रेकिंग 10 दिनों की थी परंतु…
संतोष जी, जो दिख रहा है वह सिर्फ़ ट्रेकिंग नहीं, बल्कि दर्द और दुःख के बीच की वह रेखा है जिसे आपने खुद पकड़ा - पैरों का दर्द शरीर की सच्ची प्रतिक्रिया थी, पर पीछे हटने का मन, 'मुंह कैसे दिखाऊंगी' वाला डर, वह दुःख था जो अहंकार बनाता है। यही फ़र्क अब आपकी बेपरवाही का आधार बन गया है - चोट से डर नहीं, क्योंकि चोट शरीर की है, पर पीछे हटना अब पहचान का सवाल नहीं रहा। यह साफ पानी, वह ठहरे हुए पहाड़, वह बिना जल्दबाजी के लौटना अपनों से बात करने की ओर, यह सब एक ही दिशा बता रहे हैं - ज़रूरत और विलासिता का फ़र्क शरीर पर उतर कर दिखा है। अब इसे रोज़मर्रा में भी परखिए - कौन सी बेचैनी शरीर की है, और कौन सी उस पुरानी छवि को बचाने की जो कभी हार मानने से डरती थी। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401


















