
आज मैं आप सभी के साथ अपनी टेनिस टूर्नामेंट जीत साझा कर रहा हूँ। ये टूर्नामेंट जीतना इसलिए खास है। क्योंकि एक तो 42 की उम्र में आचार्य जी से प्रेरणा लेकर टेनिस सीखना शुरू किया था। और अभी मैं 45 का हो चुका हूँ। आज से लगभग 18 महिने पहले मैं जिस society में रहता हूँ। वहाँ की RWA से काफी झगडा हुआ था। इस कारण उन्होंने मेरे टेनिस खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस टूर्नामेंट में 25, 30 और 40 साल के भी खिलाडी भाग ले रहे थे। सब पिछले दो साल से लगातार खेल रहे है। मुझे तैयारी के लिए सिर्फ 10 दिन का समय ही मिला था। टूर्नामेंट को लेकर शुरुआत में बहुत ज्यादा चिंता थी। लेकिन फिर आचार्य जी की सीख याद आयी कि सफलता पर ध्यान देने के स्थान पर खेलने पर ध्यान दो। एक बार जब कोर्ट पर उतरा तो सब छोडकर बस उस समय खेलने पर ध्यान दिया, बाकी सब अपनेआप हो गया। खेलते हुए बीच बीच में अहंकार फूलने लगता था तो उस समय बस ईमानदारी से देखने पर वह गायब भी हो जाता था। वाकई में अगर गीता सत्रों से ना जुडा होता तो कभी नहीं हो पाता।बहुत बहुत धन्यवाद आचार्य जी🙏🙏🙏



















