
🌱 बदलाव अपनी सोच और व्यवहार को देखने से शुरू होता है। देवी में शक्ति देखने के साथ, क्या हम घर की स्त्री को भी उतनी ही स्वतंत्रता और अपने निर्णय लेने का अधिकार देते हैं? मैं मेरी को कंडिशन बताना चाहूंगी, मेरे घर में मेरे भाई मम्मी पापा सब है लेकिन मैं जब भी उनसे अपनी बात करूं कि मुझे मेरा काम खुद करने दिया करो में खुद सेल्फ इंडिपेंडेंट होना चाहती हु, तो कहने के लिए वो बस हा कह देते है लेकिन जब करने की बारी आती है तो कहते है तुम अकेली बाहर नहीं जाओगी कैसी को लेकर जाओ। और में कुछ बोल दिन तो इसका विरोध कर दूं कि मुझे इतना बड़ा इसलिए किया कि मैं अब भी घरवालों पर आश्रित रहूं। और मेरा भाई जो मुझसे छोटा है लेकिन घरवाले मेरे लिए मेरे फैसले वो खुद नि लेगे मेरा जो भाई कहेगा वहीं होगा अगर मुझे कही बाहर जाना हो तो वो मना कर देगा तो मेरे घरवाले मुझे जाने नहीं देंगे। जैसे अभी नवरात्रि चल रही है तो वो व्रत रहता है तो मैने उससे question किए कि किस देवी के लिए तुम व्रत रहते हो? उस देवी के लिए जो सिर्फ तुमने परंपराओं के नाम पर सब मन रखा है कि सब पूजा व्रत रखते है तो तुमने भी ये कर लिया ओर तुम देवी की पूजा कर रहे हो लेकिन तुम्हारे घर में जो तुम्हारी बहन है उसको तो तुम स्वतन्त्रता देना नहीं चाहते। न मुझे मेरा काम करने देते न और तुम पूजते देवी को हो लेकिन तुम्हारे घर की जो स्त्री है उसे कैद किए हो। कभी कभी लगता है कि घरवाले की जो सोच है उसे कैसे बदलू क्योंकि जब भी कुछ में बोलती हु जैसे आचार्यजी की बात बोली तो कहते अपना ज्ञान अपने पास रखो या कवि में आचार्यजी की रिकॉर्डिंग सुनती तो high volume कर लेती ताकि सबको सुनाई दे तो फिर कहते कि ये क्या सुनती रहती हो। हम मन में विचार आते है कि इस घर में जो लाइफ है वो कैद की ही है तो मन करता की घरवालों से अपनी आजादी के लिए लड़कर अपनी new freedom life start karu............✨



















