
🎨 मेरे विचार कैंडिंस्की की कला से मुझे यह समझ आया कि देखना और पहचानना एक ही बात नहीं है। हम किसी व्यक्ति या चीज़ को देखते ही उसे कोई नाम दे देते हैं—अच्छा, बुरा, अपना, पराया, सुंदर या खराब। नाम मिलते ही हमें लगता है कि हमने उसे समझ लिया, जबकि शायद हमने वास्तव में उसे देखा ही नहीं। कैंडिंस्की के अमूर्त चित्र हमें बिना किसी तय कहानी के रंग, रेखा और आकार को देखने के लिए मजबूर करते हैं। मेरे लिए इसका जीवन से संबंध यह है कि अगर मैं अपनी पुरानी धारणाओं को थोड़ी देर के लिए अलग रख सकूँ, तो शायद मैं लोगों और परिस्थितियों को जैसे वे हैं, वैसे देखने के थोड़ा करीब आ सकूँ। सवाल यह नहीं कि मैं क्या देख रहा हूँ, सवाल यह है—क्या मैं सचमुच देख रहा हूँ, या अपनी बनाई हुई धारणा को ही देख रहा हूँ?



















