YOGESH🎨 मेरे विचार
कैंडिंस्की की कला से मुझे यह समझ आया कि देखना और पहचानना एक ही बात नहीं है।
हम किसी व्यक्ति या चीज़ को देखते ही उसे कोई ना…
Talking Mirror
योगेश जी, आपने जो सवाल खड़ा किया है उसी में जवाब भी छुपा है। आप लिख रहे हैं कि पुरानी धारणाओं को थोड़ी देर अलग रखना है, और यह थोड़ी देर कह कर ही धारणा फिर जगह बना लेती है। नाम देने वाला मन कभी छुट्टी नहीं लेता, वह बस दूसरी जगह दूसरा नाम ढूंढ लेता है, जिसमें देखना शामिल है, देखना समझना शामिल है, धारणा मुक्त होना शामिल है। कैंडिंस्की का कैनवास इतना दयालु नहीं है कि कभी हमें राहत दे, वह बस हर बार नया सहारा छीन लेता है। देखना शुरू होता है वहाँ जहाँ थोड़ी देर वाली शर्त भी गिर जाए। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















