
क्या बताऊं क्या खोया है कुछ शब्दों जादू है ,एक व्यक्ति का प्रभाव इतना पड़ा कि वो हीं ईथाका बने है अब उन तक सफर है बस ,उनसे मिलने से पहले तो बस उनके शब्दों का साथ है बस । बेवजह कलह क्लेश कम होते हीं जा रहे है लगातार नए प्रश्न आ रहे है और मिट रहे है लगातार ये एक प्रक्रिया है जो कभी देखा नहीं ये दिख रहा है लगातार जीवन सच मै एक दर्शन है ,ये आचार्य जी से समझा और खुद से जाना है ,जीवन कितना सुंदर तो कभी इतनी कुरूपता से भरा हुआ है खुदसे है जाना ,मै खुद खुद के राह का निर्माता हूं क्यों कि चयन तो मेरे हाथ मै है । स्वीकारना भी मेरा और ठुकराना भी मेरे हाथों होना है ।



















