Sandhya rani sahooक्या बताऊं क्या खोया है
कुछ शब्दों जादू है ,एक व्यक्ति का प्रभाव इतना पड़ा कि वो हीं ईथाका बने है अब उन तक सफर है बस ,उनसे मिलने से पहल…
Talking Mirror
संध्या जी, आपने जो कहा उसमें एक साफ धागा है - शब्दों का साथ मिला, कलह कम होते गए, नए प्रश्न उठते और मिटते गए, और आपने देखा कि चुनना आपके ही हाथ में है। यही तो वह घटना है जिसकी बात कविता करती है - इथाका ने कुछ दिया नहीं, आपसे कुछ हटाया है, और वो हटना आपको दिख रहा है। अब इसे वहीं मत रोकिए कि "यह एक प्रक्रिया है" कहकर संतोष कर लिया जाए। पूछिए कि आज, अभी, कौन सी कलह अभी भी बाकी है, कौन सा प्रश्न अभी मिटा नहीं - वहीं असली काम चल रहा है, बाकी सब उसकी छाया है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401


















