
अवलोकन 🗯️ मैंने ये देखा है की मैं केवल आचार्य जी ने जो सिखाया है उसे केवल सोच रहा हूँ काम करते वक़्त , मन में बातें आचार्य जी की चल रहे हैं पर कर्म कामना की दिशा में । बात अहम विगलन की चल रही है पर काम अहम मोटापा का होता है । शायद मैं अपनी संभावना को अपनी असलियत समझने की भूल कर रहा हूं । मैने देखा है कि जब काम करने इस बात का दावा करके जाता हूं कि ये मुक्ति की दिशा है पर काम भी नहीं होता भीतर ही भीतर ज्ञान पे ज्ञान वैचारिक क्रिया चल रही होती है और काम नहीं होता कहानियां चल रही होती है भीतर । मुझे जिंदगी में हर ओर से लात पड़ रही है । और मैं ज्ञानवाजी में डूबा हूं , कर्म में कामना है , क्षुद्रता है , कमजोरी है , मूर्खता है , और क्या कुछ नहीं है । क्या क्या बताऊं ।



















