
आज का दिन मेरे लिए थोड़ा खास है, क्योंकि फरवरी से जो बातें मैं आचार्य जी को सुनकर समझने की कोशिश कर रही थी, उनका असर अब सिर्फ सुनने या सोचने तक सीमित नहीं रहा,मैं उन्हें अपनी ज़िंदगी में महसूस करने लगी हूँ। आचार्य जी मैंने एक बात बहुत गहराई से समझी कि एक नारी का सशक्त होना सिर्फ बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि सत्य के प्रति ईमानदार होने, खुद को समझने और लगातार अपने ऊपर काम करने में है। शायद इसलिए आज जिम जाना भी मेरे लिए सिर्फ वर्कआउट नहीं था, यह अपने शरीर के साथ-साथ अपने मन और जीवन पर भी काम करने की उसी यात्रा का एक छोटा-सा हिस्सा लगा। बदलाव अचानक नहीं आता, लेकिन जब आपकी सोच बदलने लगती है और आप खुद में उसका असर देखने लगते हैं, तब वो एहसास सच में बहुत खास होता है।





















