Sibani Lenkaआज का दिन मेरे लिए थोड़ा खास है, क्योंकि फरवरी से जो बातें मैं आचार्य जी को सुनकर समझने की कोशिश कर रही थी, उनका असर अब सिर्फ सुनने या …
Sibani Lenka जी, फरवरी से सुनना शुरू हुआ और आज बात जिम तक पहुँची, यानी बात कान से उतरकर शरीर तक आ गई। और ध्यान से देखिए कि आपने खुद क्या लिखा है: शरीर के साथ मन और जीवन पर भी काम। सुनी हुई बात जब तक सुनने तक रहती है, वह जानकारी रहती है। जब वह सुबह उठकर कुछ करवाने लगे, तब वह सुनने वाले को बदलने लगती है। इस पूरी बात में एक नई जगह भी दिखती है। 'नारी का सशक्त होना' अभी एक बनी बनाई पहचान की भाषा में आया है, जबकि बाकी पूरा अनुभव आपका अपना है। इसे और खोलने के लिए आचार्य जी के सत्रों और रिकॉर्डिंग्स में उतरना जारी रखिए, और जो बदलाव दिख रहा है, उसे इसी तरह यहाँ लिखती रहिए। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401


















