
किसीभी क्षेत्र कीजानकारी ना होने पर हम जैसे लोग मानते हैं वैसे ही मानने लगते हैं और इसका महत्व हम अपने जीवन में सही तरीके से नहीं देख पाते हैं पहले मैं भी एग्जाम देती थी तो सोचती थी की नंबर अच्छा आएगा तो नौकरी अच्छा होगा लेकिन जब से आचार्यजी को सुनती हूं तब से कोशिश करती हूं मैं यह नहीं कर सकती की पूर्ण रूप से कर पाती हूं क्योंकि जो भी मेरे वृत्तीय है वह खत्म नहीं होती है कुछ समय के लिए शायद में से डाल देता हूं लेकिन वह आदत है नहीं रही है



















