Anuradha kumariकिसीभी क्षेत्र कीजानकारी ना होने पर हम जैसे लोग मानते हैं वैसे ही मानने लगते हैं और इसका महत्व हम अपने जीवन में सही तरीके से नहीं देख प…
Talking Mirror
अनुराधा जी, आपने खुद वह जगह पकड़ी है जहाँ संख्या सोच को चला रही थी नंबर अच्छा तो नौकरी अच्छी, यह एक तैयार हिसाब था जिसकी जाँच कभी नहीं हुई। अब सुनने के बाद कोशिश होती है, पर वृत्तियाँ कुछ समय के लिए दब भर जाती हैं, मिटती नहीं यह देखना ही असली काम है, निराशा की बात नहीं। आदत बनी रहेगी, क्योंकि यह कोई एक बार की जीत नहीं है। सवाल यह है कि जब वही पुराना हिसाब फिर सिर उठाए, तब कोशिश को दोहराने की नीयत कितनी गहरी है, चाहे वह हर बार तुरंत सफल न हो। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401


















