
1️⃣ लोकधर्म के कारण भारत में यह मान लिया गया है कि खेलकूद सिर्फ लड़कों के लिए ही होते हैं, लड़कियां घर के काम करती हुई ही अच्छी लगती है और शादी करके दूसरे घर जाकर फिर उस दूसरे घर के काम काज करते हुए और अपने बच्चों और पति की देखभाल करने के लिए होती है। परंतु वास्तविकता बिल्कुल अलग है, खेल भेदभाव नहीं करते गोल्ड मेडल का कलर गोल्ड ही रहेगा फिर चाहे वह लड़की लाए या फिर लड़का। 🥇 लोकधर्म में यही सिखाया जाता है कि कैसे आप एक आदर्श बेटी, आदर्श पत्नी, आदर्श बहू, आदर्श मां बन सकती हो लेकिन एक आदर्श खिलाड़ी बनना कभी उसे सिखाया ही नहीं जाता। उदाहरण के तौर पर वर्तमान भारतीय हॉकी टीम की अनेक खिलाड़ियों ने बताया कि किस प्रकार जब वो practice के लिए घर से बाहर निकलती थी तो पूरा समाज उनके कपड़ों को लेकर प्रश्न चिन्ह खड़े करता था, यह सोच लोकधर्म की ही देन है। 2️⃣ आचार्य जी शरीर को अहंकार की पहली कॉलोनी कहते हैं क्योंकि अहंकार शरीर के द्वारा ही अपने विषयों को और अधिक मजबूती प्रदान करता है। वह शरीर को समझा सकता है तुम कमजोर हो, या तुम एक लड़की हो। खेलकूद तुम्हारे लिए नहीं बने तुम इनसे दूर रहो इत्यादि - इत्यादि। 3️⃣ एक Cricket match खेलते हुए, मैं wicket keeping कर रहा था तो match का first ball ही ground पर bounce करके मेरी नाक पर लगा और खून ऐसे बहा जैसे किसी ने water tap on करदी हो। मुझे लगा ठीक है होता है, लेकिन फिर दोस्तों के चेहरे पर डर देखकर थोड़ा सा डर मुझे भी लगा कहीं मेरी नाक vecna [Stranger Things] के जैसी तो नहीं हो गई, उसके बाद headache भी होने लगा फिर मेरे दोस्त मुझे hospital लेकर गए जहाँ xray हुआ और उसमें 2 fractures आये। Doctors ने कहा बेटा 6-7 महीने rest करना है अब practice नहीं हो पाएगी। उस time कुछ समझ नहीं आ रहा था बस दर्द बर्दास्त के बाहर हो रहा था फिर सोचा यार इस moment की एक picture तो capture करनी चाहिए मेरे दोस्त मुझे देख कर डरे हुए थे और मैं smile के साथ photo click करवा रहा था। मेरे इस pic को देखकर बहुत सारे दोस्तों ने पूछा हँस कैसे रहा था यार तू इतनी चोट के बाद मैंने कहा geeta sessions join कर लो तुम भी हँसने लगोगे ऐसी छोटी- मोटी injury पर।





















