
🏃♀️❤️ “कभी किया नहीं, तो कैसे पता होगा?” — 51 साल की उम्र में पहली 5K! 🏅 मैं, मेरा भाई और माताश्री — हम तीनों ने मैराथॉन में हिस्सा लिया। 👨👩👧 मे 10K दौड़ रही थी और माताश्री और भाई 5K मे दौड़ा रहे थे। दौड़ शुरू होने से पहले स्ट्रेचिंग करते हुए मैंने मम्मी से पूछा, “मम्मी, 5 किलोमीटर हो जाएगा आपसे?” 😅 उन्होंने बड़े सहज भाव से कहा, “हो ही जाएगा, धीरे-धीरे कर लेंगे। कभी किया नहीं, तो कैसे पता होगा?” 😊 और फिर दौड़ शुरू हुई! 🏃♀️💨 मम्मी 51 साल की हैं। इससे पहले उन्होंने कभी एक किलोमीटर के आसपास भी नहीं दौड़ा था। उनके एक घुटने में लिगामेंट की इंजरी हो चुकी है और उसका ऑपरेशन भी हुआ था। 🩹 इसलिए जब भी उनकी साँस भरती या रफ़्तार धीमी पड़ती, मैं पूछता, “मम्मी, पैर या घुटने में दर्द तो नहीं हो रहा?” वो कहतीं, “नहीं, घुटने में दर्द नहीं है।” ❤️ हाँ, एक-दो बार पेट के किनारे दर्द हुआ, तो उन्होंने कुछ देर तेज़ चलकर रफ़्तार संभाली और फिर दौड़ने लगीं। रास्ते में पानी, जूस और फल भी मिल रहे थे। 🥤🍎 मैंने पूछा कि कुछ लेना है? उनका जवाब था, “नहीं-नहीं, चलते हैं, कंटिन्यू करते हैं।” 💪 और सबसे अच्छी बात — उन्होंने 5 किलोमीटर के पूरे सफ़र में एक बार भी ब्रेक नहीं लिया। 🔥 पहली ही मैराथॉन, पहली ही कोशिश और लगभग 42 मिनट में 5K पूरा! 🏅🎉 मुझे उनकी इस बात ने सबसे ज़्यादा प्रभावित किया कि उन्होंने पहले से यह तय नहीं कर लिया था कि उनसे होगा या नहीं। उन्होंने कोशिश की और अपनी गति से पूरा कर लिया। 🙌❤️ 🪷 हम अक्सर अपनी ही धारणाओं को अपनी सीमाएँ बना लेते हैं। 🤔 जिसे हम “मैं नहीं कर सकता” मानते हैं, क्या वह सच है या सिर्फ़ मन की बनाई धारणा? ✨ बिना जाँचे खुद को सीमित कर लेना भी अज्ञान ही है।






















